पट्टदकल स्मारकों के बारे में रोचक तथ्य - Pattadakal Temple Interesting facts

पट्टदकल स्मारकों के बारे में रोचक तथ्य - Pattadakal Temple Interesting facts
पट्टदकल, कर्नाटक के मशहूर स्थलों में से एक है यह अपनी खूबसूरती के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। पट्टदकल ने 7 वीं और 8 वीं सदी में चालुक्य वंश के तहत उत्तरी और दक्षिणी भारत के वास्तुशिल्प रूपों का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण हासिल किया। इसमें हिंदू और जैन मंदिरों की एक श्रृंखला को दर्शाया गया है।

बादामी शहर से 22 किमी की दूरी पर स्थित, पट्टडकल अपने प्रभावशाली स्मारकों के लिए जाना जाता है। यह 1987 में विश्व धरोहर स्थल माना जाता था। यहाँ, वास्तुकला का सुंदर टुकड़ा चालुक्य वंश के प्रभुत्व की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है। रॉक कट और संरचनात्मक स्मारकों दोनों को देख सकते हैं कि वास्तुकला, कला, साहित्य, प्रशासन और उस समय के विकास के अन्य क्षेत्रों में बहुत कुछ है। कुल मिलाकर, पट्टाडाकल स्मारकों में 10 मंदिर शामिल हैं। एक परिसर में उनमें से आठ को पा सकते हैं।
उनके दीवारों को देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजाया गया है। विशेष रूप से, रामायण, महाभारत, किरातार्जन्य, और पंचतंत्र के विभिन्न प्रसंगों को भी मंदिरों में चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है। प्रमुख रूप से, बनशंकरी मंदिर और विरुपाक्ष मंदिर लोगों द्वारा देखे जाते हैं और बादामी के करीब स्थित हैं।
पट्टाडाकाल स्मारकों के अंतर्गत आने वाले कुछ अन्य महत्वपूर्ण मंदिर हैं- जम्बुलिंग मंदिर, मल्लिकार्जुन मंदिर, जैन मंदिर और पापनाथा मंदिर।

पट्टदकल मंदिरों के विशेष मंदिर -  Pattadakal Temple


विरुपक्षा मंदिर - Virupaksha temple

विरुपक्षा मंदिर
पुराने लेखों के अनुसार रानी लोक महादेवी के द्वारा बनाया गया था। विरुपक्षा मंदिर को विक्रमादित्य द्वितीय के पल्लाओं के ऊपर विजय प्राप्त करने के उपरांत बनाया गया था। इस मंदिर में भक्तों को उग्र नरसिम्हा, नटराज, रावण अनुग्रह और लिंगोद्भव की प्राचीन मूर्तियां देखने को मिलेंगे मंदिर के अंदर बहुत ही बारीकी से काम किया गया है जो इसे बहुत ही सुंदर बनाता है। और इससे बहुत ही नजदीक विट्ठल मंदिर भी है। यह मंदिर बहुत ही पुराना मंदिर है जहां पर अक्सर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा ही रहता है।

मल्लिकार्जुन मंदिर - Mallikarjun Temple

मल्लिकार्जुन मंदिर - Mallikarjun Temple
मल्लिकार्जुन मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य की पत्नी रानी महादेवी के द्वारा ही कराया गया था यह एक प्राचीन मंदिर है, मल्लिकार्जुन मंदिर का ढांचा विरुपक्षा मंदिर की तरह ही है और यह विरुपाक्ष मंदिर से बहुत नजदीक है यदि कोई भी पर पर्यटक विरुपक्षा मंदिर आता है तो वह मल्लिकार्जुन मंदिर आ सकता है। किसी के पास एक गौरी मंदिर भी है जिसके पास यह से आसानी से जाया जा सकता है।

संगामेश्वर मंदिर - Sangameswar Temple

संगामेश्वर मंदिर, पट्टदकल मंदिरों में से एक है इसे पहले विजयवाड़ा मंदिर के नाम से भी जाना जाता था। या एक ऐसा मंदिर है जिसमें कई राजाओं ने बनवाने में योगदान दिया था। जैसे, चालुक्य विक्रमादित्य और सत्याक्ष्य थे। इस मंदिर में जो आकर्षण का केंद्र है वह सबसे बड़ा यह है कि यह मंदिरों में से सबसे प्राचीन मंदिर है।

चंद्रशेखर मंदिर  - Chandrashekhar Temple

चंद्रशेखर मंदिर पूर्व की दिशा में स्थित एक छोटा सा मंदिर है। और इसकी सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि इसका एक गर्भ ग्रह है जिसमें एक शिवलिंग स्थापित है तथा एक बंद हाल है। इसकी कारीगरी की बात की जाए तो इसमें ऐसी बारी की कारीगरी की गई है जो इस मंदिर को पर चार चांद लगा देता है। इस मंदिर में आपको हजारों श्रद्धालु मिल जाएंगे क्योंकि यह मंदिर पर्यटकों को को इसलिए आकर्षित करती है कि दूसरी मंदिरों की तरह इसमें त्रिकोण आधार ऊंची छत नहीं है बल्कि इसकी छत समतल है।

पापनाथ मंदिर - Papnath Temple

पापनाथ मंदिर
पापनाथ मंदिर, दक्षिण दिशा में स्थित है यह विरुपाक्ष मंदिर से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह मंदिर अंदर से इतना बड़ा है कि इसके अंदर मंडप भी बने हुए हैं। इस मंदिर के बीच वाला भाग शिव और नटराज के लिए सजा हुआ है और बाकी का हिस्सा विष्णु भगवान के अलग-अलग रूपों के लिए सजा हुआ है। पापनाथ मंदिर के पास ही बदामी मंदिर स्थित है यदि पर्यटक कभी भी पाप नाथ मंदिर आते हैं तो वह बदामी मंदिर का भी आनंद ले सकते हैं।

जैन नारायण मंदिर - Jai Narayan Temple

जैन नारायण मंदिर, को राजा कृष्ण-2 ने 19वीं सदी में बनवाया था। जैन नारायण मंदिर तीन मंजिला मंदिर है जिसमें से सबसे नीचे की इमारत अभी भी कुछ सही हालत में है। जय नारायण मंदिर भी बाकी मंदिरों की तरह चौकोर आकार का है था यह पूर्ण रूप से जैन धर्म को समर्पित है और इस मंदिर में सभी धर्म के पर्यटक आते रहते हैं।

काशीविश्वनाथ मंदिर - Kashi vishwanath mandir

काशीविश्वनाथ मंदिर, चंद्रशेखर मंदिर की तरह ही एक छोटा मंदिर है। काशी विश्वनाथ मंदिर में गर्भ ग्रह है जो चौकोर आकार का है इसमें पूर्व दिशा में एक नंदी मंडप है।
यह मंदिर प्राचीन काल के मंदिरों में से एक है यदि यहां कोई पर्यटक आता है तो उसको कई आकर्षक चीजें दिखाई देगी।

जंबू लिंगेश्वर मंदिर - Jamboo Lingeswar Temple

जंबू लिंगेश्वर मंदिर, प्राचीन मंदिरों में से एक है जिसे पर्यटकों को द्वारा बहुत ही पसंद किया जाता है। या दूसरे मंदिरों की तरह ही चौकोर आकार का है इसमें एक गर्ग रहा है जिसमें एक शिवलिंग है। यदि आप इस मंदिर को देखने के इच्छुक हैं तो आप यहां जरूर विजिट कर सकते हैं क्योंकि यह प्राचीन मंदिरों में से एक है जो बहुत ही आकर्षक है।

गाला नाथ मंदिर - Gala Nath Temple

गाला नाथ मंदिर
गाला नाथ मंदिर, एक प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण 750 C. E. मैं हुआ था यह यहां के मंदिरों में से सबसे अंतिम मंदिर है। इस मंदिर में एक शिवलिंग है जिसे स्पर्श शिवलिंग कहा जाता है। गाला नाथ मंदिर सभी मंदिरों में से अलग है क्योंकि इसका आकार पिरामिड आकार का है तथा इसमें एक बहुत बड़ा हाल है। इस मंदिर में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र और इसका विचित्र आकार है जो पर्यटकों को बहुत लुभाता है और यह बहुत ही सुंदर मंदिर है।

कदासिद्धेश्वर मंदिर - Kadasideswar Temple

कदासिद्धेश्वर मंदिर, यहां के कुछ छोटे मंदिरों में से एक है। कदासिद्धेश्वर मंदिर को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने 17वीं शताब्दी में बनवाया था। लेकिन इस जॉर्ज माइक ने आठवीं शताब्दी में ही बनवाने की घोषणा कर दी थी यह एक चौकोर मंदिर है जिसका एक गर्भ ग्रह है। इसके बाहरी दीवारों पर अर्धनारीश्वर का चित्र अंकित किया गया है इसकी अर्धनारीश्वर चित्रों को देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे यदि आप यहां घूमने का प्लान बनाते हैं तो यह आपके लिए एक आकर्षण का केंद्र रहेगा
कदासिद्धेश्वर मंदिर - Kadasideswar Temple


बकाया सार्वभौमिक मूल्य - Outstanding universal value

क्राउन रूबीज के शहर के रूप में जाना जाता है, पट्टडकल चालुक्य स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है। यह विश्व धरोहर स्थल शाही राज्याभिषेक के लिए जाना जाता था जिसे "पेट्टाडाकिसुवोलल" कहा जाता था। यहाँ, 11 वीं और 12 वीं शताब्दी के युग से संबंधित शिलालेखों के साथ-साथ सिंगिराजपुराण और हम्मिरा काव्य की साहित्यिक कृतियाँ साबित करती हैं कि चालुक्य राजाओं की ताजपोशी की गई थी। विशेष रूप से, पट्टदकल कभी चालुक्य वंश की राजधानी थी। संगमेश्वर मंदिर इस क्षेत्र का सबसे पुराना स्मारक है और इसका निर्माण 697 ईस्वी और 733 ईस्वी के दौरान हुआ था।

How to reach Pattadakal - पट्टडकल कैसे पहुंचे

Pattadakal कर्नाटक राज्य में स्थित है तथा यहां पहुंचना बहुत ही आसान है। यहां के लिए बेंगलुरु, बेलगांम और बादामी से रोड के माध्यम से आप आसानी से पहुंच सकते हैं। यदि आपके मन में यह सवाल है कि पट्टदकल कैसे पहुंचे तो निम्न माध्यम से आप पर पट्टदकल पहुंच सकते हैं।

Pattadakal Train

यहां के लिए बदामी सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है पट्टदकल से 22 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पर सभी जगह से लगातार ट्रेन आती रहती हैं जैसे सोलापुर अहमदाबाद आप बदामी पहुंचने के बाद वहां से पट्टदकल के लिए टैक्सी ले सकते हैं जो आसानी से आपको उपलब्ध होगी।

Pattadakal Airport

यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट बेलगाम एयरपोर्ट है जो पट्टदकल से 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहांभारत के सभी स्थानों से फ्लाइट आती जाती रहती है तथा यहां का सबसे नजदीकी इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेंगलुरु एयरपोर्टहै

Pattadakal By Road

पट्टदकल जाने के लिए रोड बहुत ही आसान माध्यम है यह हर राज्य के रोड से कनेक्टेड है।

Language of Pattadakal - पट्टडकल की भाषा

पट्टदकल कर्नाटक राज्य में स्थित है और कर्नाटक की राज्य भाषा कन्नड़ है इसी हिसाब से पट्टदकल की भी भाषा कन्नड़ ही है। परन्तु यदि आपको कन्नड नहीं आती है तो घबराने की बात नहीं है यदि आपको थोड़ी बहुत इंग्लिश आती है तो भी आपका काम चल जाएगा हालांकि कुछ लोग यहां पर हिंदी भी बोल सकते हैं।

Pattadakal Temple Timing

यह हफ्ते के सातों दिन ओपन रहता है तथा सुबह से लेकर शाम तक इसमें आप विजिट कर सकते हैं।

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